असल दुनिया में भले ही ईश्वर और उसके नाम पर मांगी जा ने वाली क़ुर्बानियां ताक़तवर हुई हैं. लेकिन रील में ख़ुद को भगवान बताने वाला गणेश गायतोंडे दूसरे सीज़न में कमज़ोर और बेवकूफ़ बनता दिखता है. इसे बिना स्पॉइलर के समझना है तो आ प-पास के बाबाओं पर ग़ौर कीजिए. वो बाबा जो कृपा बरसा ने के नाम पर लाखों करोड़ों की भीड़ अपने साथ लिए हुए हैं. इन बाबाओं के दर पर चुनाव से प हले नेता मत्था टेकते हैं. फिर आस्था के इन मंचों से माइक से ऐलान होता है-अबकी बार, आम आदमी का हाथ... मंचों से चूती ये कृपा, भीड़ अपने मुंह पर चुपड़ लेती है और जाने-अनजाने मिशन में जुट जाती है. "ग्लोबल वॉर्मिंग से लेकर इंटरनेट धार्मिक प्रॉपेगैंडा सब दुनिया ख़त्म करने में लगे हैं. सब पागल कुत्ते की तरह एक-दूसरे को काटने दौड़ेंगे. इतना धुं आ भरेगा कि धरती के पशु, पक्षी सब स माप्त हो जाएंगे. धरती का तापमान गिरेगा और आप सब न्यूक्लियर विं टर देखेंगे." धार्मिक प्रॉपेगैंडा में फँसे लोग कहां नहीं हैं? " मेरे अब्बा पहलू ख़ान को अगर वीडियो में दिख रहे लोगों ने नहीं मारा तो वो मरे कैसे ? " मारने वाले लोग...